दूसरी कक्षा के नए पाठ्यक्रम ने बढ़ाया बस्ते का बोझ

नागपुर : विद्यार्थियों के बस्ते के बोझ को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। इस वर्ष स्टेट बोर्ड की दूसरी कक्षा का पाठ्यक्रम बदला गया। नए पाठ्यक्रम में बस्ते का बोझ कम होना अपेक्षित था। नए पाठ्यक्रम में एक पुस्तक और जोड़ दिए जाने से बस्ते का बोझ उल्टा बढ़ गया है। “खेलेंगे, बोलेंगे, सिखेंगे’ यह नई पुस्तक जोड़ी गई है। चित्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को बारिश, फूलों का सम्मेलन, मंगलवार की कहानी, बिल्ली ही दहीहांडी, मोरपंख, खेल खेले, नक्कल, सब्जियों की पहचान आदि पाठ इस पुस्तक में पढ़ाए जाएंगे।

प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र अंतर्गत प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रूची बढ़ाने की दृष्टि से विविध प्रयोग किए जा रहे हैं। इस चक्कर में विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ नजरअंदाज हो रहा है। इसे लेकर महाराष्ट्र और देशभर में आवाज उठाई जा रही है। बस्ते का बोझ कम करने के लिए पाठ्यक्रम में सुधार करने के अनेक शिक्षावीदों ने सुझाव दिए हैं। विविध सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं। नागरिकों की मांग और विद्यार्थियों पर बस्ते के बोझ से हो रहे प्रतिकुल परिणाम देख सुधारित पाठ्यक्रम में बस्ते का बोझ कम होने के कयास लगाए जा रहे थे। परंतु स्टेट बोर्ड की दूसरी कक्षा के नए पाठ्यक्रम में अपेक्षाभंग हुआ है। पुराने विषय कायम रखते हुए एक नया विषय और जोड़ दिया गया है।

नए पाठ्यक्रम में दूसरी कक्षा के लिए बालभारती, गणित, माय इंग्लिश और नया विषय खेलेंगे, बोलेंगे, सिखेंगे यह चार विषय रहेंगे। सुधारित पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को विषय समझाने के लिए रंग-बिरंगी चित्रों पहले के मुकाबले बढ़ाए गए हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि विद्यार्थियों में स्कूल के प्रति रूची बढ़ाने, पाठ्यक्रम आसनी से समझाकर दैनंदिन व्यवहार और दिनचर्या सिखाने की दृष्टि से ज्यादा से ज्यादा फोटो का इस्तेमाल किया गया है।

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