आंधी में शहर की बिजली कंपनियों को 1 करोड़ 33 लाख का नुकसान

नागपुर : मानसून आने से पहले ही शहर में आंधी ने दस्तक दे दी थी। शहर में आंधी ने बहुत तबाही मचाई थी जिससे कई लोगोें की टीन शेड छत उड़ गई कई क्षेत्र में पेड़ भी धराशायी हो गए थे। साथ ही इलेक्ट्रिक पोल, ट्रांसफार्मर, कंडक्टर और केबल भी टूट गई थी। इससे यह ताे पता चल गया है कि मौसम में होने वाले बदलाव या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए शहर की महावितरण और एसएनडीएल बिजली वितरण कंपनी तैयार नहीं है।

बारिश और तेज हवाओं के चलते ही दूर्घटना हो इसलिए बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। बिजली बंद करना कोई उपाय नहीं है। इसके लिए पहले से तैयारियां करनी चाहिए जो कि नहीं की गई। इस बार की आंधी में दोनो वितरण कंपनी को एक करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई के लिए एसएनडीएल ने इंश्योरेंस क्लेम किया है। महावितरण ने नुकसान की रिपोर्ट राज्य सरकार को दी है जिसे फंडिंग के दौरान पूरा करेंगे।

मौसम के रूख बदलते ही शहरवासियों का बिजली जाने का डर लगने लगता है क्योंकि इस तरह की आपदा से निपटने के लिए कोई विशेष तैयारी न होना। जिसका खामियाजा वितरण कंपनी को भी भुगतना पड़ता है दोनों कंपनियों को 1 करोड़ 33 लाख 83 हजार का नुकसान हुआ है। यह नुकसान बहुत बड़ा है। इसमें एसएनडीएल को 85.3 लाख का नुकसान हुआ है साथ ही महावितरण को 48 लाख का नुकसान हुआ है।

आंधी में शहर के कई हिस्सों में पोल, कंडक्टर और केबल टूटने के कारण अंधेरे में रहे थे जिसमें एसएनडीएल के 42 एलटी और 17 एचटी पोल धराशायी हुए थे। साथ ही 6 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर, 16.2 किमी के एलटी कंडक्टर, 4.2 किमी के एचटी कंडक्टर और 6.1 किमी की केबल टूटी थी। इस नुकासन के लिए एसएनडीएलने इंश्यारेंस क्लेम किया है जिसमें उसे 27 लाख क्लेम में मिल रहे हैं। महावितरण को भी कुल 48 लाख का नुकसान हुआ है।

एसएनडीएल की तुलना में महावितरण को कम नुकसान हुआ है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक नुकसान हुआ है। शहर में महावितरण के 43 एएमटी एचटीपोल से 2.26 लाख, 265 एएमटी एलटीपोल से 7.23 लाख, 3.83 किमी की एचटी लाइन से 16.58 लाख, 11.41 किमी के एलटी लाईन से 7.46 लाख, 9 एएमटी डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर से 12.67 लाख, 2 डीपी स्ट्रक्चर से 2.10 लाख का नुकसान हुआ है।

यदि फिर से इस तरह की समस्या होती है तो शहर को फिर से अंधेरे में रहना होगा। इसकी पूरी रिपोर्ट महावितरण राज्य सरकार को दी है जिसकी भरपाई फंडिंग के दौरान होगी।

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