मनपा द्वारा मराठी माध्यम स्कूल बंद किये जाने का विरोध

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नागपूर :- पिछले कुछ समय में शहर में बंद हो रहे मराठी माध्यमों की स्कूलों के विरोध में लोगों में रोष देखा जा रहा है। आज के दौर में सभी पालक वर्ग अपने बच्चो को अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाई के लिए भेज रहे है जिसका असर शहर में मराठी माध्यमों की स्कूलों पर पड़ा और वर्तमान में मराठी स्कूलों में छात्रों की संख्या कम हो रही है I इसे लेकर मराठा शाला वाचवा कृति समिति द्वारा आंदोलन शुरू किया गया है।

स्कूल शुरू होते ही कॉटन मार्केट चौक स्थित क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा के सामने समिति द्वारा प्रदर्शन कर मनपा द्वारा 34 मराठी माध्यम की स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध किया गया। इस दौरान अंग्रेजी स्कूलों की दलाली बंद करने और मराठी माध्यम की स्कूल शुरू करने की मांग को लेकर नारेबाजी और घोषणाएं की गईं। शिक्षक विधायक ना.गो. गाणार ने कहा कि लॉर्ड मैकाले का सपना वर्तमान सरकार पूरा कर रही है। लॉर्ड मैकाले ने कहा था कि अगर भारतीय संस्कृति को खत्म करना है तो भारत में अंग्रेजी भाषा में शिक्षा देनी होगी। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों की शिक्षा नीति समान है। दोनों पार्टियां शिक्षा का निजीकरण एवं व्यापारीकरण की नीति अपनाते आई है।

मराठी माध्यमों की स्कूलों को बंद किए जाने का मुद्दा नागपुर में होने जा रहे अधिवेशन में उठाया जाएगा। मनपा शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश गवरे ने मनपा शिक्षण विभाग द्वारा 34 मराठी स्कूलों को बंद करने की तीव्र शब्दों में निंदा की।

मनपा द्वारा जानबूझकर मराठी स्कूलों को बंद कर अंग्रेजी स्कूलों के लिए रास्ता खुला किया जा रहा है। यहीं वजह है कि हर इलाके में कॉन्वेंट खुल रहे हैं। कृति समिति के संयोजक जम्मू आनंद ने सवाल किया कि मनपा सदन में प्रस्ताव मंजूर किए बिना इतनी स्कूलों को बंद कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बहुजन और श्रमजीवी समाज पर अंग्रेजी में प्राथमिक शिक्षा थोप कर सरेआम बच्चों को पंगु बनाया जा रहा है। इसके खिलाफ सभी को संगठित होना होगा।

 

 

 

 

 

 

 

आंदोलन को मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक व किसान डॉ सुनील ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानी लीलाताई चितले, रवींद्र देवघरे, राजेंद्र झाडे, यशवंत तेलंग, रवींद्र फडणवीस ने भी विचार रखे। प्रदर्शन में वरिष्ठ साहित्यिक डॉ. वि.स. जोग, डॉ. भारती सुदामे, देवराव मांडवकर, अरुण लाटकर, माया चवरे, कल्पना महल्ले, रामराव बावणे, प्रफुल चरडे, माया गेडाम, रमेश गवई आदि उपस्थित थे।

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