चंद्रयान: NASA के दावे को ISRO ने किया खारिज, कहा- हमने पहले ही ढूंढ लिया था विक्रम लैंडर

नासा (NASA) ने कहा था कि चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के विक्रम लैंडर का मलबा क्रैश साइट से 750 मीटर दूर मिला है. नासा ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी थी.

ISRO

नई दिल्ली: मिशन चंद्रयान (Chandrayaan-2) के विक्रम लैंडर को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के बड़े दावे को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने खारिज कर दिया है. नासा ने बुधवार को चेन्नई के एक मैकेनिकल इंजीनियर को क्रेडिट देते हुए विक्रम लैंडर का मलबा मिलने का दावा था. इसे खारिज करते हुए ISRO के प्रमुख के. सिवन ने कहा कि हमने पहले ही विक्रम लैंडर को ढूंढ लिया था. सिवन ने कहा कि नासा से पहले हमारे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर को ढूंढा था और इसकी जानकारी हमने पहले ही दे दी थी. उन्होंने कहा कि आप पुराने रिपोर्ट से इसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

बता दें कि दो दिन पहले ही नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (LRO) ने चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा तलाशने का दावा किया था. नासा ने कहा था कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा क्रैश साइट से 750 मीटर दूर मिला है. नासा ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी थी. नासा ने विक्रम लैंडर का मलबा ढूंढने का क्रेडिट चेन्नई के इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यम को दिया है.

नासा ने अपने बयान में कहा, ’26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्‍वीर जारी की गई थी और विक्रम लैंडर के सिग्नल्स की खोज करने के लिए लोगों को बुलाया गया था.’ नासा ने आगे बताया, ‘शनमुगा सुब्रमण्यन नाम के शख्स ने मलबे की एक सकारात्मक पहचान की. उन्होंने ही LRO प्रोजेक्ट से संपर्क किया. शानमुगा ने मुख्य क्रैश साइट के उत्तर-पश्चिम में लगभग 750 मीटर की दूरी पर स्थित मलबे की पहचान की थी. यह पहले मोजेक (1.3 मीटर पिक्सल, 84 डिग्री घटना कोण) में एक एकल उज्ज्वल पिक्‍सल पहचान थी.’

ISRO ने मांगी डिटेल रिपोर्ट

न्यूज़ एजेंसी एएफपी के मुताबिक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने नासा से विक्रम लैंडर के मलबे से जुड़ी डिटेल जानकारी मांगी है. नासा जल्द ही इससे जुड़ी रिपोर्ट सौंपेगा.

हार्ड लैंडिंग के बाद अंतरिक्ष में खो गया था विक्रम लैंडर

चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की 7 सितंबर को चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी. तब सतह को छूने से सिर्फ 2.1 किमी पहले लैंडर का इसरो से संपर्क टूट गया था. इसरो के अधिकारियों की तरफ से कहा गया था कि लैंडिंग के दौरान विक्रम गिरकर तिरछा हो गया है, लेकिन टूटा नहीं है. वह सिंगल पीस में है और उससे संपर्क साधने की पूरी कोशिशें जारी हैं. कई कोशिशों के बाद भी विक्रम लैंडर से संपर्क नहीं हो पाया. इसके बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसरो को मदद की पेशकश की थी. हालांकि, चांद पर लूनर डे हो जाने के कारण इसरो और नासा को अपनी तलाश रोकनी पड़ी. बाद में इसरो ने बयान जारी किया कि विक्रम लैंडर हमेशा के लिए खो चुका है.

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